Afghan Jalebi Lyrics – Akhtar Phantom | Original song (Dumbek verson)
Singer Akhtar Chanal Zahri
Music………
ओ...
Music……………..
मख्तूल जिगर (या बाबा)
क़ातिल है नज़र (या बाबा)
इक महजबीन ( या बाबा)
इक नूर बनी ( या बाबा)
रब की रुबाई (या बाबा)
या है तबाही
गर्दन सुरही (या बाबा)
बोली इलाही (या बाबा)
अफगान जलेबी
माशूक फरेबी
घायल है तेरा दीवाना भाई वाह, भाई वाह
बन्दूक दिखा के क्या प्यार करेगी
चेहरा भी कभी दिखाना भाई वाह,भाई वाह X2
ख्वाजा जी की पास तेरी चुगली करुंगा
मैं तेरी चुगली करुंगा
हां तेरी चुगली करुंगा
अंगूठी में क़ैद तेरी ऊँगली करुंगा
मैं तेरी चुगली करुंगा
मैं तेरी चुगली करुंगा (x2)
ओ.. देख दराज़ी (वल्लाह)
बंदा नमाज़ी (वल्लाह)
खेल के बाज़ी (वल्लाह) खामाखा
अब ठहरा न किसी काम का (वल्लाह, वल्लाह ..)
मीर का कोई (वल्लाह) शेर सुना के (वल्लाह)
घूंट लगा के (वल्लाह) जाम का
मैं रहा खान मेहज़ नाम का
ओए लखत-ए-जिगर (या बाबा)
ओए नूर-ए-नज़र (या बाबा)
इक तीर है तू (या बाबा)
मैं चाक जिगर (या बाबा)
बंदों से नहीं तो अल्लाह से डरेगी
वादा तो कभी निभाना भाई वाह, भाई वाह
ख्वाजा जी की पास तेरी चुगली करुंगा
मैं तेरी चुगली करुंगा
हां तेरी चुगली करुंगा
अँगूठी में क़ैद तेरी उनगली करुंगा
मैं तेरी चुगली करुंगा
मैं तेरी चुगली करुंगा (x2)
अस्सी ना वोई-वोई मैं तेरी चुगली करुंगा
अस्सी ना वोई वोई मैं तेरी चुगली करुंगा
समशीर निगाहें चाबुक सी अदाएँ
नाचीज़ पे न चलाना भाई वाह, भाई वाह
बन्दूक दिखा दिखा के
क्या प्यार करेगी
चेहरा भी कभी दिखाना, भाई वाह, भाई वाह
Music…..

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